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🔰BIG NEWS : 30 साल पुराने फर्जी पुलिस मुकाबले के आरोपी 2 पूर्व पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद, 5-5 लाख रुपए जुर्माना
🔰पढिए पूरा मामला

गुरदासपुर (न्यूज़ लिंकर्स) : गुरदासपुर के अतिरिक्त सेशन जज हरमिंदर सिंह राय की अदालत ने 30 साल पुराने एक फर्जी एनकाउंटर मामलें में दो पुलिस अधिकारियों को उम्र कैद और पांच-पांच लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा पाने वाले मुलाजिमों में थाना डेरा बाबा नानक में तैनात तब के सहायक SI चनन सिंह और ASI तरलोक सिंह शामिल है। फर्जी एनकाउंटर के इस महत्वपूर्ण मामले में शिकायतकर्ता कलनौर के अलावलपुर की महिला लखबीर कौर ने अदालत में याचिका दायर की थी।शिकायतकर्ता ने बताया कि 21 मार्च 1993 को दोपहर के समय वह अपने बेटे बलविंदर सिंह के साथ बस में सवार होकर गांव भोमा से वापस आ रही थी। इसी बस में उनके जानकार विरसा सिंह, उसकी पत्‍नी सुखविंदर कौर और उसका बेटा बलजिंदर सिंह उर्फ लाटू भी सफर कर रहे थे। उसने बताया कि बस तलवंडी रामा के बस स्टैंड पर रुकी तो अचानक थाना डेरा बाबा नानक के SHO बलदेव सिंह, कांस्टेबल चनन सिंह, कांस्टेबल निर्मल सिंह और कुछ अन्य पुलिस मुलाजिम बस में आ घुसे। उन्होंने जबरदस्ती उनके बेटे बलविंदर सिंह और साथ सफर कर रहे नौजवान बलजिंदर सिंह को आंतकवादी बता कर बस में से उतार लिया। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि पुलिस उन्हें डेरा बाबा नानक थाने में ले गई। परिवार और गांव वाले थाना डेरा बाबा नानक में गए और नौजवान को बेकसूर बताते हुए रिहा करने की मांग की मगर उनकी कोई नहीं सुनी गई। उस समय पुलिस ने थाने में बलविंदर सिंह नामक के एक अन्य नौजवान भी बिठाया हुआ था। उसने बताया कि 3 मार्च 1993 पुलिस उन्हें जबरी गाड़ी में बैठाकर गांव कठियाली की ओर ले गई। नौजवान शोर मचा रहे थे कि उन्हें मार दिया जाएगा। थोड़े समय के बाद जब पुलिस की गाड़ी उक्त गांव पहुंची तो गांव के लोगों ने गोलियां चलने की आवाज सुनीं। इस तरह नौजवानों को झूठे मुठभेेड़ में मार दिया गया था. शिकायतकर्ता लखबीर कौर ने बताया कि उनके बेटे का शव भी नहीं दिया गया और पुलिस ने खुद ही संस्कार कर दिया। इस मामले की सुनवाई करीब 30 साल तक चली। इस दौरान तीन अन्य आरोपित थाना प्रभारी बलदेव सिंह, एएसआई ज्ञान सिंह और हेड कांस्टेबल निर्मल सिंह की भी मौत हो चुकी थी। इस तरह अदालत ने दो पुलिस मुलाजिमों चनन सिंह और त्रिलोक सिंह को उम्रकैद के साथ साथ पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माने की यह राशि पीड़ित परिवार को सौंपी जाएगी।

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