
जालंधर (धीरज अरोड़ा) : अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज विशेष कंबोज की अदालत ने दहेज हत्या से जुड़े जालंधर के एक बहुचर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-B एवं 34 के आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने तीन में से एक आरोपी सागर पुत्र राज कुमार, निवासी गांधी कैंप, जालंधर को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दोषी करार देते हुए उसे पाँच वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने वकील अभिषेक भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत की गई सशक्त, तथ्यपरक एवं कानूनसम्मत दलीलों से सहमत होते हुए तथा साक्ष्यों के अभाव में अन्य आरोपियों दर्शना पत्नी राज कुमार एवं रितु पुत्री राज कुमार, दोनों निवासी गांधी कैंप, जालंधर को बरी किए जाने का आदेश दिया है। इस मामले की पैरवी में एडवोकेट अभिषेक भारद्वाज के साथ एडवोकेट हितेश सूरी ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और पूरे ट्रायल के दौरान प्रभावी कानूनी सहयोग प्रदान किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि अभियोजन पक्ष दहेज मांग एवं दहेज मृत्यु से संबंधित आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा है। इस मामले में सभी आरोपियों के विरुद्ध 08 अप्रैल 2021 को थाना बस्ती बावा खेल, जालंधर में दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। उल्लेखनीय है कि जालंधर स्थित शहीद बाबू लाभ सिंह नगर में 07 अप्रैल 2021 (बुधवार) को 25 वर्षीय विवाहिता प्रवीण का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रवीण ने अपने पति सागर, सास दर्शना एवं ननद रितु से कथित रूप से दहेज को लेकर हो रही प्रताड़ना और मारपीट से तंग आकर आत्महत्या की। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या के तहत मामला दर्ज किया था।








