जालन्धर (हितेश सूरी) : एक तरफ राज्य में नकली शराब से मचा मौत का तांडव और दूसरी तरफ सरकार द्वारा अलाट ठेकों पर प्रति बोतल लगभग 200 रूपया प्रिंट मूल्यो से अधिक वसूलने की कैप्टन सरकार की नीति ने सरकार का चेहरा बेनकाब कर दिया है। शराब बेच कर सरकार चलाने के पीछे सिर्फ कैप्टन ही नहीं ब्लकि उनकी पूरी की पूरी व्यवस्था तैनात है l ठेके पर बैठे एक करींदे से लेकर कैप्टन के सिपाहसलार (विधायक, आबकारी विभाग, पुलिस व अन्य एजेंसिया) तक इस प्रणाली में भागीदार है l नशे की कमर तोड़ने को लेकर धार्मिक पुस्तके हाथ में लेकर कसमें खा सत्ता में आने वाली सरकार नशे पर इस हद तक निर्भर हो चुकी है की अब नकली शराब से मरने वाले लोगों की गिनती इस सरकार के लिए मायने नहीं रखती l पुलिस प्रशासन के सबसे निम्न स्तर के अधिकारी कांस्टेबल तक को मुहल्ला-मुहल्ला, गांव-गांव चल रहे नजायज ठेको की पूरी जानकारी रहती है पर जब राजा ही भ्रष्टाचार की नाव पर सवार हो तो सैनिक भी क्या करे… पंजाब में नकली शराब से हुई मौतो की यदि गम्भीरता से जांच की जाए तो कोई ज्यादा लम्बा- चौडा गणित सामने नहीं आएगा l कोरोना लॉकडाउन के चलते हर परिवार आर्थिक परेशानी से दो-चार है l ऊपर से शराब के आदी परिवार चलाने वालो को जब सरकार द्वारा ही फिक्स दुकानों (ठेकों) पर जब शराब डयोढे मूल्यों पर मिलेगी तो स्पष्ट सी बात है वो घर- घर डिलिवरी कर रहे सस्ती शराब के तस्करो के सम्पर्क में आएगे ही, ऐसे में उनकी किस्मत उन्हे क्या मिल रहा है यह तो कैप्टन ही बता सकते है की आखिर सरकार लोगों के साथ यह खेल क्यो खेल रही है l

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