जालंधर (हितेश सूरी) : कोरोना महामारी का संताप धीरे-धीरे रौद्र रुप धारण करता जा रहा है l ऐसे वक्त पर जहां स्वास्थ्य विभाग अग्रिम पंक्ति में इस भयानक महामारी से लड़ रहा है, वहीं इसका एक कोरोना से भी भयानक पक्ष सामने आ रहा है l कोरोना से जंग जीत चुके कुछ नगरवासियों ने न्यूज़ लिंकर्स से बातचीत में बताया की कोरोना से जंग के दौरान उन्हे बीमारी से इतना कष्ट नहीं हुआ जितना की उनका नाम व मोहल्ला मीडीया में प्रकाशित होने के कारण हुआ है l उन्होंने कहा की कोरोना संक्रमितो के आंकड़ो की सूची जारी करने के पीछे तो स्वास्थ्य विभाग का औचित्य समझ में आता है पर संक्रमित रोगी का नाम व पहचान प्रकाशित करवाने के पीछे विभाग की क्या मंशा है यह लोगो की समझ से बाहर है l कोरोना संक्रमण से उबरे एक दुकानदार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग व मीडीया की इस नालायकी का खमियाजा केवल उन्हें 14 दिन ही नहीं बल्कि रिपोर्ट नैगिटव आने के 3 महीने से भी अधिक समय तक भुगतना पड़ रहा है l अत्यंत मार्मिक शब्दो में उक्त दुकानदार ने कहा की पहचान प्रकाशित होने के बाद तो उनकी दुकानदारी पूरी तरह ठप्प हो गई है l नगर के एक प्रतिष्ठित डाक्टर व बिजनेसमैन ने भी कुछ ऐसी ही व्यथा बयान की है l बताते चले की स्वास्थ्य विभाग व मीडीया की इस नालायकी का खमियाजा लगभग हर वर्ग चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या नेता हर वर्ग ने भुगता है व भुगत रहा है l कहना न होगा की इसी भय के चलते कुछ प्राइवेट लैबो व अस्पतालो ने लोगो को सामाजिक व परिवारिक प्रतिष्ठा का डर दिखा कर दोनो हाथो से लूटा है व लूट भी रहे है l संक्रमण के इस भयावह माहौल में सरकार को सख्त निर्देश जारी करने चाहिए कि किसी भी सूरत में संक्रमित मरीज का नाम या पहचान उजागर नहीं किया जाना चाहिए केवल नैगिटव अथवा पोजिटिव संक्रमित मरीजो का आंकड़ा ही प्रकाशित होना चाहिएl इससे संक्रमित लोग बिना किसी भय के अपना कोरोना टेस्ट करवाने के लिए भी सामने आएगे l

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