BREAKINGCHANDIGARHDOABAJALANDHARMAJHAMALWAPOLITICSPUNJAB

पंजाब में हुए पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री तुरंत दें इस्तीफा : एडवोकेट अभिषेक भारद्वाज

पेपर लीक के सभी मामलों की जांच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी को सौंपने की उठाई मांग

जालंधर (विशेष): जालंधर के जानें-मानें एडवोकेट अभिषेक भारद्वाज ने पंजाब में लगातार सामने आ रहे कथित पेपर लीक मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य बार-बार दांव पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इस्तीफे की मांग की जा सकती है, तो पंजाब में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान पंजाब में कई भर्ती एवं बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मई 2022 में नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, वर्ष 2023 में TET परीक्षा, 12वीं अंग्रेजी का पेपर, जून 2024 में ADO परीक्षा, दिसंबर 2025 में सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड की परीक्षा तथा हाल ही में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को लेकर पेपर लीक के दावे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एडवोकेट अभिषेक भारद्वाज ने कहा कि यदि शिक्षा विभाग के कार्यकाल में बार-बार ऐसी गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं, तो शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच हो सके और युवाओं का भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार का दायित्व है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाया जाए तथा पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अंत में एडवोकेट अभिषेक भारद्वाज ने कहा कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पंजाब के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके। साथ ही उन्होंने मांग की कि पेपर लीक के सभी मामलों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराकर दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!