जालंधर (ब्यूरों): राष्ट्र सर्वोपरि संगठन के कोषाध्यक्ष एवं समाजसेवी अजय कुमार अग्रवाल ने लखनऊ के अलीगंज स्थित गेमिंग ज़ोन में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा देशभर में भवन सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। अजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और व्यावसायिक लाभ के लिए जन-सुरक्षा से समझौता करने की प्रवृत्ति का परिणाम प्रतीत होती है। उन्होंने हादसे में मृतकों और घायलों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का दायित्व केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ित परिवारों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए। ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि प्रत्येक मृतक के आश्रित परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि परिवार को दीर्घकालिक आर्थिक संबल मिल सके। वहीं गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को कम से कम 10 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाए, जिससे उनके उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था हो सके। उन्होंने कहा कि देश के अनेक व्यावसायिक भवनों, गेमिंग ज़ोन, कोचिंग सेंटरों और होटलों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, धुआं नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षित निकासी मार्गों का अभाव है। ऐसी परिस्थितियां किसी भी भवन को संभावित मृत्यु-कूप में बदल सकती हैं। अजय कुमार अग्रवाल ने यह भी चिंता जताई कि कई भवनों में छत तक पहुंचने वाले मार्गों को ताला लगाकर बंद रखा जाता है, जिससे आपात स्थिति में लोगों के पास बच निकलने का विकल्प नहीं रहता। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसे मामलों को दंडनीय अपराध घोषित करने तथा भवन मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में उन्होंने हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, भवन मालिकों और प्रबंधन से जुड़े लोगों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की भी मांग की। साथ ही देशभर में भवन सुरक्षा मानकों, विद्युत वायरिंग व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा उपकरणों के नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया। अजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि केवल कानून बनाने से ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगेगी, बल्कि समाज में ईमानदारी, संवेदनशीलता और मानव जीवन के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन और समाज से मिलकर ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाने का आह्वान किया, जिससे भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।










