जालंधर (न्यूज़ लिंकर्स ब्यूरो) : पंजाब में सामाजिक और धार्मिक संगठनों को मजबूत करने के उद्देश्य से शिवसेना टकसाली (सुधीर सूरी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रिज मोहन सूरी जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अहम बैठक करने जा रहे है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री के सचिव से बातचीत हो चुकी है और बैठक का समय जल्द तय होने की संभावना है ।इस संबंध में जानकारी देते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रिज मोहन सूरी ने बताया कि पंजाब में शिवसेना टकसाली (सुधीर सूरी) के अंतर्गत चल रही विभिन्न वेलफेयर सोसायटियों और समाजसेवी संस्थाओं को “फ्री वॉलंटियर पावर” देने की मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के मुख्य उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी से बैठक की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के हजारों कार्यकर्ता बिना किसी सरकारी सहायता के लगातार समाज सेवा में लगे हुए हैं और पंजाब में मानवता की सेवा को आगे बढ़ा रहे हैं। श्री सूरी ने कहा कि राज्य में बढ़ते सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि वेलफेयर सोसायटियों को विशेष स्वयंसेवी अधिकार और प्रशासनिक सहयोग मिलता है, तो धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था, गरीबों की सहायता, आपातकालीन सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा के कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। श्री सूरी ने कहा कि शिवसेना टकसाली (सुधीर सूरी) हमेशा समाज सेवा और हिंदू समाज की आवाज बुलंद करने के लिए कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता लगातार रक्तदान शिविर, जरूरतमंद परिवारों की वित्तीय सहायता, धार्मिक यात्राओं में सेवा और युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने के लिए अभियान चला रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि गृह मंत्री से की जा रही इस बैठक में पंजाब की वेलफेयर सोसायटियों को कानूनी पहचान, विशेष स्वयंसेवी अनुमति तथा सामाजिक सुरक्षा कार्यों में सहयोग देने जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है। आपको बता दे कि राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक गलियारों में इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि यदि केंद्र सरकार द्वारा इन मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाता है, तो पंजाब में समाज सेवा से जुड़े संगठनों को नई मजबूती और पहचान मिल सकती है। इस अवसर पर शिवसेना टकसाली (सुधीर सूरी) के पदाधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ होने वाली यह बैठक पंजाब के सामाजिक और धार्मिक संगठनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।










