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हरसिमरत कौर बादल पैदायशी झूठी : कैप्टन अमरिन्दर सिंह

चंडीगढ़, :हरसिमरत कौर बादल द्वारा राज्य में मौजूदा कोविड संकट पर राजनैतिक हलचल मचाकर असंवेदनशील कोशिशें किए जाने पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज कहा कि झूठ बोलना अकाली नेता की आदत है और यहाँ तक कि बहुत ही संजीदा मसलों पर झूठ बोलना और भी शर्मनाक है, ख़ासकर उस समय पर, जब राज्य के स्वास्थ्य कर्मचारियों के अथक यत्नों के स्वरूप कुछ सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वैसे तो सभी पंजाबी यह जानते हैं कि हरसिमरत बादल पैदायशी झूठी है और कोविड की स्थिति संबंधी उसकी टिप्पणी ने और भी निचला स्तर उजागर किया है।’’ उन्होंने महामारी के मसले पर घटिया राजनीति खेलने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री की आलोचना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के ठोस प्रयासों, जिससे कोविड फ्रंट पर कुछ सफलता मिली है, का साथ देने की बजाय हरसिमरत बादल और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल समेत बाकी लीडरशिप महामारी के प्रबंधन पर उनकी सरकार की घटिया स्तर की आलोचना कर रही है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इस महामारी ने किसी भी राज्य या मुल्क को नहीं बख्शा और हमारे राज्य का चिकित्सा भाईचारा इसके विरुद्ध लडऩे के लिए दिन-रात काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा भाईचारे के अथक यत्नों के स्वरूप पिछले कुछ दिनों में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और पंजाब अब कोविड के अधिक से अधिक मामलों वाले पाँच सर्वोच्च राज्यों में शामिल नहीं है। बीते दिन केंद्र सरकार द्वारा जारी किए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 राज्यों में कोविड-19 के नए मामलों में बड़ी वृद्धि हुई है, जिसमें 24 घंटों के समय में 80.92 प्रतिशत केस वायरस के नए स्ट्रेन के सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब, इस सूची में शामिल नहीं और यह स्थिति आज भी बरकरार है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ दिनों से स्थिति में सुधार हुआ है।मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कोविड के खि़लाफ़ लड़ाई में पंजाब अभी भी जीत से दूर है परन्तु यह समय चढ़दीकला में रहने और सभी फ्रंटलाईन वर्करों की सराहना करने का है जो बीते एक साल से भी अधिक समय से सख़्त मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इन फ्रंटलाईन वर्करों की सख़्त मेहनत, समर्पण भावना और बलिदान की दाद देने की बजाय हरसिमरत बादल इस बात को लेकर चिंतित है कि महामारी से राजनैतिक शोहरत कैसे पाई जाए, जबकि उनका अपना राज्य और लोग इस महामारी का प्रकोप झेल रहे हैं।’’ कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इन वर्करों की कोशिशों को घटाकर देखने की कोशिशों के लिए अकाली नेता की सख़्त निंदा की।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सवाल किया, ‘‘क्या उनको यह एहसास नहीं कि इस तरह के बयान फ्रंटलाईन वर्करों और समूचे पंजाब के लोगों के मनोबल को कैसे चोट पहुँचा रहे हैं? या उनको इसकी कोई परवाह नहीं, क्योंकि उनका सारा ध्यान मेरी सरकार को नीचा दिखाने के बहाने ढूँढना है।?’’उन्होंने कहा कि वास्तव में समूचा देश और विश्व महामारी के प्रभावों का सामना कर रहा था, जिससे पंजाब भी नहीं बचा और विभिन्न राज्यों में समय-समय पर स्थिति में सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा कि हरसिमरत ने इन सभी तथ्यों को अनदेखा करते हुए झूठे दोषों और संकुचित राजनीति का पक्ष लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पंजाब पर महामारी के ख़तरे और $खातक प्रभावों ख़ासकर मौतें होने की स्थिति में, इसके ख़तरे को कम करके नहीं देखा। उन्होंने कहा कि अपने राज्य निवासियों की मौतें होने की स्थिति में भी हरसिमरत को अपनी राजनीति चमकाने के मौके के सिवा और कुछ नहीं दिखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार लोगों में टीका लगवाने के प्रति हिचकिचाहट से भी भली-भाँति अवगत है और इस बारे में खुलकर बात कर रही है, परन्तु हरसिमरत शायद यह भूल गई है कि बड़ी समस्या भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार है, जिसमें वह हिस्सेदार रही हैं, के खि़लाफ़ कृषि कानूनों के मुद्दे पर लोगों में पाई जा रही नाराजग़ी और गुस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप (हरसिमरत) काले कानूनों का पक्ष न लेते और अपने हितों की जगह पंजाब के हितों को पहल देते तो राज्य में अधिक से अधिक लोग बिना किसी डर के खुलेआम टीकाकरण करवाते।’’मुख्यमंत्री ने राज्य में राजनैतिक जमावड़ों पर पाबंदी लगाने के हुक्मों में गलतियाँ निकालने के लिए भी हरसिमरत को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ने स्वैच्छा से रैलियाँ और जलसा न करने का फ़ैसला लिया है, सुखबीर के नेतृत्व में अकाली बिना मास्क और किसी भी तरह की सामाजिक दूरी को अपनाए बिना पूरे गर्व के साथ ऐसी रैलियाँ करके बेचैनी फैला रहे थे। उन्होंने ऐसी ग़ैर-जि़म्मेदाराना कार्यवाहियों के लिए अपनी पार्टी का बचाव करने के लिए हरसिमरत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब में कोरोना की दूसरी लहर के आने के बाद यदि शिरोमणि अकाली दल और ‘आप’ ने ऐसी लापरवाहियां न दिखाई होती तो उनको राजनैतिक जमावड़ों पर पूर्ण पाबंदी लगाने के लिए मजबूर न होना पड़ता।

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