
जालंधर (योगेश सूरी) : पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बंपर जीत के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। इस जीत ने भाजपा नेताओं में नया जोश भर दिया है, जिसका असर अब पंजाब की सियासत में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि बंगाल के बाद अब पंजाब में तख्तापलट की बारी है। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वहीं पंजाब भाजपा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्टर जारी करते हुए लिखा— “बंगाल के बाद पंजाब की बारी, भाजपा की है पूरी तैयारी।” इस पोस्टर और बयानबाजी के बाद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला है।

पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भाजपा नेताओं के दावों को खारिज करते हुए कहा, “ये शेखचिल्ली के सपने हैं। पंजाब में BJP को वोट नहीं मिलेंगे। पंजाबी जिस बात पर अड़ गए, उस पर अड़ गए।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बाहरी राजनीतिक माहौल का पंजाब की राजनीति पर सीधा असर नहीं पड़ता और यहां के लोग अपने मुद्दों के आधार पर ही फैसला लेते हैं। बंगाल की जीत के बाद पंजाब में भाजपा की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ‘न्यूज़ लिंकर्स’ द्वारा किए गए विश्लेषण में कई राजनीतिक विश्लेषकों और माहिरों ने अपने विचार रखे। उनका मानना है कि भाजपा अब पंजाब में अधिक आक्रामक रुख अपनाएगी और संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

इस मौके पर राष्ट्र सर्वोपरि संगठन के कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने कहा कि बंगाल की जीत भाजपा के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है, इससे पार्टी को उन राज्यों में भी आगे बढ़ने का हौसला मिला है, जहां वह अब तक मजबूत नहीं रही। उन्होंने कहा कि पंजाब में भाजपा अब जमीनी स्तर पर काम तेज करेगी और नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश करेगी।

वहीं पूर्व आप नेता डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर बढ़ रही अंदरूनी गुटबाज़ी आने वाले समय में पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी की मजबूती उसकी एकजुटता और जमीनी काम में होती है, और यदि अंदरूनी मतभेद बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर उसके जनाधार पर पड़ता है। हालांकि, डॉ शर्मा ने भाजपा के दावों पर भी संतुलित रुख रखते हुए कहा कि सिर्फ उत्साह और बड़े दावों के दम पर पंजाब में राजनीतिक जमीन तैयार करना आसान नहीं है। यहां की जनता हर दल को काम के आधार पर परखती है, इसलिए सभी पार्टियों को गंभीरता से जनता के मुद्दों पर ध्यान देना होगा।

वही समाज सेवक विकास ढांडा का यह भी मानना है कि भाजपा की आक्रामक रणनीति का सीधा असर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर पड़ सकता है। खासकर AAP में अंदरूनी असंतोष और संभावित टूट की आशंकाएं जताई जा रही हैं। वहीं कांग्रेस के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है, क्योंकि भाजपा विपक्ष के स्पेस को तेजी से भरने की कोशिश करेगी। उनका कहना है कि आने वाले समय में पंजाब की राजनीति और ज्यादा गर्माने वाली है। एक तरफ भाजपा अपने विस्तार के मिशन में जुटेगी, तो दूसरी ओर AAP और अन्य दल अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए रणनीति तैयार करेंगे। कुल मिलाकर, बंगाल की जीत ने पंजाब में सियासी माहौल को नई दिशा दे दी है। फिलहाल अब देखना यह होगा कि भाजपा का यह आत्मविश्वास पंजाब की जमीन पर कितना असर दिखा पाता है और क्या वाकई राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत होने वाली है।










