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🌐क्या कहते है विश्व प्रसिद्ध हृदय विशेषज्ञ डॉ अश्वनी सूरी डेंगु के बारे में
🌐कोरोना के बाद अब डेंगु का हमला जानिए क्या है डेंगु

मच्छर के काटने के लगभग 4 से 10 दिन तक इसके लक्षण आते है

जालंधर (हितेश सूरी) : कोरोना के बाद घर-घर पांव पसार रही डेंगु बुखार की बीमारी ने अब लोगो को सकते में डाल दिया है। इस बारे अधिक जानकारी देते हुए टैगोर हॉस्पिटल के मुख्य ह्रदय विशेषज्ञ डॉ अश्वनी सूरी ने बताया कि डेंगू बुखार मनुष्यों में मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली बीमारीयों में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण बीमारी है। यह एडीज इजिप्टि नामक मच्छर द्वारा काटने से होता है और यह उष्णकटिबंधीय इलाके में सबसे ज्यादा फैलता है l एक रिसर्च के मुताबिक विश्व की 40 से 50 प्रतिशत जनसंख्या को डेंगु होने का खतरा है। डॉ सूरी ने कहा कि वैसे तो डेंगु स्वयं सीमीत होने वाली बीमारी है। इसका वायरस 4 प्रकार का है एक प्रकार का डेंगु तो मात्र बुखार कमजोरी जैसे लक्षणों के साथ ही ठीक हो जाता है दिक्कत तब आती है जब किसी को पहले एक प्रकार का डेंगु हुआ हो व फिर उसे दुबारा किसी और प्रकार का डेंगु दोबारा हो जाए इसे गंभीर किस्म का डेंगु कहा जाता है जिसमें बुखार के साथ-साथ सैल (प्लेटलैट्स) कम होना, ब्लड प्रैशर कम होना और कभी-कभी तो मरीज की मृत्यु भी हो सकती है । मच्छर के काटने के लगभग 4 से 10 दिन तक इसके लक्षण आते है। डॉ सूरी ने कहा कि अक्सर मरीज को बुखार, त्वचा पर लाली के साथ दाने व कंपकपी होती है जो 2-3 दिन चलती है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इसकी गंभीरता कम होती है। तेज़ बुखार (104 डिग्री से ज्यादा) , सिर व आँखों के पिछले हिस्से में दर्द , मांसपेशियों में खिंचाव ,जोड़ो में दर्द (बदन टूटना) , उल्टी आदि इसके प्रमुख लक्ष्ण है। यदि इतनी देर में इलाज शुरू हो जाये तो 99 % मरीज ठीक हो सकते है। परन्तु किसी भी प्रकार की लापरवाही हो तो बीमारी का अगला चरण शुरू हो जाता है , जिसमे सैल कम होने से नाड़ियों से खून का रिसाव हो सकता है। बाह्य रूप से शरीर पर लाल चकते पड सकते है। मुँह , नाक , पेशाब , मल में खून आ सकता है। शरीर के अंदर खून की लीकेज होने से तेज़ पेट दर्द , उल्टी में खून , दौरा पड़ सकता है। साथ ही दिल की धड़कन का बढ़ना , सांस फूलना , बीपी कम होना , बेहोश होना आदि लक्ष्ण हो सकते है। ऐसे में मरीज़ की जान भी जा सकती है। डॉ सूरी ने कहा कि सही इलाज मिलने के बावजूद भी 2-5 % मरीज़ अपना कीमती जीवन बचा नहीं पाते, और इलाज के अभाव में यह आंकड़ा 20 % हो सकता है। आजकल के आधुनिक टेस्ट और इलाज की वजह से तकरीबन सभी मरीज़ ठीक हो जाते है बशर्ते मरीज़ को सही समय पर सही इलाज मिल जाये। डेंगू को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कैसे बचे डेंगु से
डॉ सूरी ने बताया कि अपने घर के आसपास पानी खड़ा मत होने दे जिसमे मच्छर पनप सकते है। टूटे गमले , खाली कूलर , खाली टायर , नाली आदि हटा दे। घरों की खिड़किया – दरवाजें भी बंद रखे। तेज़ बुखार होने पर अपने नजदीकी डॉक्टर/अस्पताल से परामर्श ले। समय पर इलाज होने से ही इस बिमारी और इसके गंभीर परिणामो को रोका जा सकता है।

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