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🌐दशहरा 2020 स्पैशल : दशहरा क्यों और कब मनाया जाता है ❓❓
🌐देखें और पढ़ें दशहरें की तिथि एवं शभ मुहूर्त और भारत में दशहरा उत्सव विभिन्न स्थानों में कैसे मनाया जाता है ❓❓

दशहरा पर्व बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक

जालंधर (न्यूज़ लिंकर्स ब्यूरों) : यह तो आप सभी जानते है कि भारत देश त्योहारों व पर्वों का देश है। यह त्यौहार व पर्व एक-दूसरे के साथ मिलने-जुलने और भाईचारा बढ़ाने के लिए ही बने है। इसी प्रकार दशहरा या विजयदशमी केवल एक पर्व ही नहीं है बल्कि दशहरा या विजयदशमी कई सारी बातों का प्रतीक है जैसे:- सच, साहस, अच्छाई, बुराई, नि:स्वार्थ सहायता, मित्रता, वीरता और सबसे बढ़कर अहंकार जैसे अलग-अलग भले-बुरे तत्वों का। अर्थात दशहरा पर्व बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक है। भगवान श्री राम ने इस दिन रावण का वध किया था। इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस का वध किया था। अहंकार के कारण बुराई के पथ पर जा निकले रावण का नाश आज भी किया जाता है। इस पर्व को सामाजिक भाईचारें एवं विजय की खुशी मनाने का प्रतीक भी माना जाता है।दशहरे का त्यौहार हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में बुराई पर अच्छाई दोनों का क्या महत्व है। हमें इससे यह भी शिक्षा मिलती है कि जीवन में एकता और सेना प्रबंधन बेहद जरुरी है। भगवान राम ने भी सभी के साथ मिलकर लंका पर जीत हासिल की थी। आप यह भी जानते है कि श्री राम सेतु बनाने में एक छोटी गिलहरी ने भी सहयोग दिया था। यह पर्व हमें गलत आदतों से दूर रहने की प्रेरणा भी देता है और यह त्यौहार भाइयों के बीच प्यार और स्नेह को भी दर्शाता है। इससे यह भी शिक्षा मिलती है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो पर कभी अच्छाई से जीत नहीं सकती । भाव : बुराई कभी ना कभी पराजित होकर रहेगी। घमंड और भेद-भाव से बचने की प्रेरणा मिलती है। श्री राम के जीवन से भी हम सभी को सत्य के राह पर चलने की प्रेणा मिलती है।

दशहरें की तिथि एवं शभ मुहूर्त

शहरा का विजय मुहूर्त सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। शत्रु पर जीत प्राप्‍त करने के लिए इस समय निकलना चाहिए। इस मुहूर्त में गाड़ी, इलेक्‍ट्रॉनिक सामान, आभूषण और वस्‍त्र खरीदना शुभ माना जाता है। इस मुहूर्त में कोई भी नया काम किया जाए तो सफलता अवश्‍य मिलती है। इस दिन शस्‍त्र पूजा के साथ ही शमी के पेड़ की पूजा भी की जाती है। साथ ही रावण दहन के बाद थोड़ी सी राख को घर में रखना भी शुभ माना जाता है। दशहरा हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी या दशहरे का पावन पर्व मनाया जाता है। इस बार दशहरा 25 अक्‍टूबर 2020 को है।

  • दशमी तिथि प्रारंभ :- 25 अक्‍टूबर 2020 को सुबह 07 बजकर 41 मिनट से
  • दशमी तिथि समाप्‍त :- 26 अक्‍टूबर 2020 को सुबह 09 बजे तक
  • विजय मुहूर्त :- 25 अक्‍टूबर 2020 को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से दोपहर 02 बजकर 42 मिनट तक
  • कुल अवधि :- 45 मिनट
  • अपराह्न पूजा का समय :- 08 अक्‍टूबर 2020 को दोपहर 01 बजकर 12 मिनट से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक
  • कुल अवधि :- 02 घंटे 15 मिनट

भारत में दशहरा उत्सव विभिन्न स्थानों में कैसे मनाया जाता है ??

उत्तर भारत में रावण के पुतले जलाने के अलावा हिमाचल प्रदेश में कुल्लू दशहरा मनाया जाता है जिसमे त्यौहार दसवें दिन शुरू होता है और अगले सात दिनों तक चलता है। यह त्यौहार उस दिन को याद करते हुए मनाते है जिस दिन राजा जगत सिंह द्वारा सिंहासन पर भगवान रघुनाथ की मूर्ति स्थापित की थी। मैसूर में दशहरा उत्सव मैसूर महल को सजाकर व दीए जलाकर बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। शहर में भी रावण, कुम्भकर्ण व मेघनाथ के पुतले बनाकर जलाए जाते हैं। मां दुर्गा की मूर्तियां भी हाथी पर सुशोभित करके मंडप तक लाई जाती हैं। पूर्व भारत में दशहरा को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। इसमें दिन व परम्पराएं राज्यों के अनुसार अलग-अलग होती हैं। इस दौरान सभी लोग मां दुर्गा की पूजा करती हैं। नवरात्रों की षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी व नवमी के दिन माता रानी की पूजा की जाती है और दशमी को धूमधाम से दशहरा पर्व मनाया जाता है। गुजरात का लोक नृत्य गरबा है और नवरात्रों के नौ दिनों में गुजरात के लोग गरबा खेलते हैं। इस दौरान लोग गरबा खेलते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं और दशमी को दशहरा पर्व मनाया जाता है।

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