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🌐 मीडिया जगत में हड़कंप ‼️
👉 ढाई लाख से अधिक अखबारों के टाईटल रद्द
👉 न्यूज़ पोर्टल और डिजिटल कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने जारी किये आदेश

नई दिल्ली (न्यूज़ लिंकर्स ब्यूरों) : मोदी सरकार ने पिछले एक साल की जांच के बाद ढाई लाख से अधिक अखबारों के टाईटल रद्द कर दिए है साथ ही सैंकड़ों अखबारों को डीएवीपी की सूची से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम को पुरानी सारी गड़बड़ी की जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें अपात्र अखबारों और मैगजीन को सरकारी विज्ञापन देने की शिकायतों की जांच भी शामिल है। इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी हैं। इसके चलते मीडिया जगत में हड़कंप है। मोदी सरकार द्वारा सख्ती के इशारे के बाद आरएनआई यानि समाचार पत्रों के पंजीयक का कार्यालय और डीएवीपी यानि विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय काफी सख्त हो चुके हैं। समाचार पत्र के संचालन में जरा भी नियमों को नजरअंदाज किया गया तो आरएनआई समाचार पत्र के टाईटल पर रोक लगाने को तत्पर हो जा रहा है। उधर, डीएवीपी विज्ञापन देने पर प्रतिबंध लगा दे रहा है। देश के इतिहास में पहली बार हुआ है जब लगभग 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल रद्द कर दिए गए और 804 अखबारों को डीएवीपी ने अपनी विज्ञापन सूची से बाहर निकाल दिया है। इस कदम से लघु और माध्यम समाचार पत्रों के संचालकों में हड़कम्प मच गया है। पिछले काफी समय से मोदी सरकार ने समाचार पत्रों की धांधलियों को रोकने के लिए सख्ती की है। आरएनआई ने समाचार पत्रों के टाइटल की समीक्षा शुरू कर दिया है। समीक्षा में समाचार पत्रों की विसंगतियां सामने आने पर प्रथम चरण में आरएनआई ने प्रिवेंशन ऑफ प्रापर यूज एक्ट 1950 के तहत देश के 269,556 समाचार पत्रों के टाइटल रद्द कर दिए। इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के अखबार-मैग्जीन (संख्या 59703) और फिर उत्तर प्रदेश के अखबार-मैग्जीन (संख्या 36822) है। इन दो के अलावा बाकी कहां कितने टाइटिल रद्द हुए हैं, देखें लिस्ट…. बिहार 4796, उत्तराखंड 1860, गुजरात 11970, हरियाणा 5613, हिमाचल प्रदेश 1055, छत्तीसगढ़ 2249, झारखंड 478, कर्नाटक 23931, केरल 15754, गोआ 655, मध्य प्रदेश 21371, मणिपुर 790, मेघालय 173, मिजोरम 872, नागालैंड 49, उड़ीसा 7649, पंजाब 7457, चंडीगढ़ 1560, राजस्थान 12591, सिक्किम 108, तमिलनाडु 16001, त्रिपुरा 230, पश्चिम बंगाल 16579, अरुणाचल प्रदेश 52, असम 1854, लक्षद्वीप 6, दिल्ली 3170 और पुडुचेरी 523

न्यूज़ पोर्टल और डिजिटल कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने जारी किये आदेश
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट, फ़िल्म और न्यूज़ को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का फ़ैसला ले लिया है।
इस बाबत आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस आदेश के बाद अब सूचना प्रसारण मंत्रालय के दायरे में आएंगे ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल। इस बाबत जारी नोटिफिकेशन से स्पष्ट है कि सरकार ऑनलाइन न्यूज़ कन्टेन्ट को रेगुलेट करना चाहती है। न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट को रेगुलेट करने के लिए सरकार ने 10 सदस्यीय कमिटी बनाई थी। इस कमिटी में सूचना व प्रसारण, कानून, गृह, आईटी मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रमोशन के सचिवों को शामिल किया गया था। इनके अलावा माई गॉव के सीईओ, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स असोसिएशन और इंडियन ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी सदस्य बनाया गया है. कमिटी से ऑनलाइन मीडिया, न्यूज पोर्टल और ऑनलाइन कन्टेंट प्लैटफॉर्म के लिए ‘उचित नीतियों’ की सिफारिश करने को कहा गया था। अब सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने ऑनलाइन न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट को रेग्युलेट करने के लिए नियम बना लिया है। मंत्रालय ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके मुताबिक अब ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल, ऑनलाइन कॉन्टेंट प्रोवाइडर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के दायरे में आएंगे। केंद्र सरकार ने इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामले में वकालत की थी कि ऑनलाइन माध्यमों का रेग्युलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है। अब सरकार ने ऑनलाइन माध्यमों से न्यूज़ या कॉन्टेंट देने वाले माध्यमों को मंत्रालय के तहत लाने का कदम उठाया है। ज्ञात हो कि ‘फेक न्यूज’ को लेकर पत्रकारों की मान्यता समाप्त करने वाला विवादित आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है।

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