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लोकसभा चुनाव 2024 : पंजाब में अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन पर पेच, टकसाली BJP-SAD नेताओं के आपसी विचारों में तालमेल की कमी ; केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग से किया साफ़ इनकार, कांग्रेस पार्टी की अंतर्कलह रूकने का नहीं ले रही नाम

जालंधर (हितेश सूरी) : आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर पंजाब में बहुत बड़ा राजनितिक विस्फोट हो सकता है। राजनितिक विश्लेषकों, पंडितों एवं नेताओं द्वारा कई क्यास लगाए जा रहे है। राजनीतिक पार्टियों द्वारा पंजाब के अलग-अलग हल्कों में कई तरह के सर्वे किये जा रहे है। गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार तीन कृषि कानून लेकर आई थी। कृषि कानूनों को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया तो पूर्व केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में अकाली दल गठबंधन से बाहर हो गई। लेकिन फिर प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया था। श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सुखबीर बादल को भी आमंत्रित किया गया था और सुखबीर बादल ने निमंत्रण पर ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया और अमृतसर में आयोजित लंगर में शामिल हुए। अब आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही है कि पंजाब में एक बार फिर भाजपा और अकाली दल का गठबंधन होने जा रहा है और दोनों पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है एवं पंजाब की 13 सीटों की शेयरिंग को लेकर फार्मूला सेट किया जा रहा है। सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और मनप्रीत बादल की तरफ से भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन कराने में अहम भूमिका निभाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार मनप्रीत बादल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ के सहयोग से शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच मतभेद दूर कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि अकाली-भाजपा के नेता हिंदू-सिख समुदाय को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं और गठबंधन का ऐलान इसी पर आधारित होगा। अगर अकाली-भाजपा गठबंधन होता है तो कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, मनप्रीत बादल सहित कई नेता अकाली दल के सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया, हरसिमरत कौर बादल सहित अकालियों के साथ मंच साझा करते नजर आएंगे। वही पिछले 10 दिनों के दौरान भाजपा के केंद्रीय लीडरशिप और अकाली दल के नेताओं समेत पार्टी प्रधान सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बी.एस. भूंदड़ और सिकंदर सिंह मलूका कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। हालांकि अकालियों ने इससे इंकार किया है, लेकिन भाजपा सूत्रों ने बैठकों और समझौते की प्रबल संभावना की पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक पंजाब के टकसाली भाजपा नेता और आर.एस.एस. इस गठबंधन के खिलाफ हैं। भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस नेताओं के एक गुट का मानना ​​है कि ‘भाजपा-अकाली दल गठबंधन’ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि पंजाब में अकाली दल के साथ भाजपा की बातचीत अंतिम दौर में है।

SAD-BSP गठबंधन भी है बड़ी बाधा इस समय पंजाब में अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन है। सूत्रों के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल के बीजेपी के साथ नहीं जाने की एक और वजह है वो है ‘अकाली दल-बीएसपी गठबंधन’, अकाली दल इस गठबंधन को तोड़ना नहीं चाहती क्योंकि बीएसपी का पंजाब में अच्छा-खासा प्रभाव है। सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि सुखदेव सिंह ढींढसा के गुट की भी अकाली दल में शामिल होने की बात चल रही है और अगर ऐसा होता है तो शिरोमणि अकाली दल को पंजाब में बड़ी मज़बूती मिलेगी।

टकसाली भाजपा नेता और अकाली नेता के आपसी विचारों में तालमेल की कमी अकाली दल के गुप्त सूत्रों ने बताया कि भाजपा पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से 6 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, जबकि अकाली दल इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है, जब अकाली दल एनडीए में शामिल था तो वो 10 सीटों पर चुनाव लड़ता रहा और भाजपा 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी और वहीं 117 सदस्यीय विधानसभा में भी अकाली दल ने 95 तो भाजपा ने 22 सीटों पर चुनाव लड़े थे। अकाली दल के नेताओं का कहना है कि भाजपा का प्रभाव केवल कुछ शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है, जबकि अकाली दल का गांव-देहात तक प्रभाव है। वही पुराने और टकसाली भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर अकाली दल के साथ भाजपा हाथ मिलाती है तो पुराने जैसे हालात फिर बन जाएंगे, जहां सरकार बनने के बाद भी BJP को साइड लाइन कर दिया जाता था। उनका कहना है कि अगर भाजपा दोबारा से अकाली दल का साथ चुनती है तो भाजपा जो विकास व विस्तार पंजाब में कर रही है, वह एक बार फिर से रुक जाएगा। भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं का मानना है कि अकाली दल का साथ छूटने के बाद भाजपा ने खुद को ग्रामीण और कई शहरी इलाकों में मजबूत किया है। सूत्रों की मानें तो अकाली दल 8-5 और भाजपा 7-6 शेयरिंग के फॉर्मूला को लेकर बातचीत कर रही है।

अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब और चंडीगढ़ में कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग से किया साफ़ इनकार आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A को भी झटका दे दिया है। अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब और चंडीगढ़ में कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग से साफ़ इनकार कर दिया है। शनिवार को लुधियाना रैली में अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और 2 महीने बाद लोकसभा चुनाव हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में 13 सीटें हैं और एक चंडीगढ़ की है, आने वाले 14-15 दिनों में इन 14 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर देंगे।

पंजाब में गठबंधन को लेकर अभी चल रही है बातचीत : अमित शाह पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा ब्यान सामने आ रहा है। एक इंटरव्यू में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पंजाब में अकाली दल के साथ अभी कुछ तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आज तक अपने किसी भी साथी को जाने के लिए नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि देश में एक प्रकार से आइडियोलॉजी के अनुसार सभी पार्टियां अपना पॉलिटिकल निर्णय करें लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने एजेंडे, प्रोग्राम और आइडियोलॉजी के अनुसार अपनी जगह स्थिर है। उन्होंने कहा कि कई साथी आते हैं, चले जाते हैं और जाने के 2 प्रकार के कारण बनते हैं, उनमें कई बार घटनाएं तो कई बार राज्य की पॉलिटिकल इक्वेशन के कारण ऐसा कदम उठाना पड़ता है लेकिन भाजपा ने कभी किसी को NDA से नहीं निकाला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा से ही गठबंधन का धर्म निभाया है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी जगहें हैं जहां भाजपा बड़ा दल बन कर आई लेकिन हमने छोटे दल को मुख्यमंत्री चुनने का मौका दिया। उन्होंने कहा कि कई जगह हमें पूर्ण बहुमत मिला फिर भी साथियों को मंत्रिपरिषद में अहम स्थान दिया। अमित शाह ने साफ कहा कि अकाली दल पर अभी कुछ तय नहीं हुआ है मगर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ क्षेत्रीय नेता, हालात, समीकरण गठबंधन के हक में नहीं दिख रहे।

कांग्रेस पार्टी की अंतर्कलह रूकने का नाम नहीं ले रही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे रविवार को लुधियाना के समराला में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वह यहां से लोकसभा चुनाव का बिगुल बजाएंगे। पंजाब कांग्रेस लुधियाना के गांव बोदली में पहले कार्यकर्ता सम्मलेन का आयोजन कर रही है। चुनाव से पहले खरगे पंजाब के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में जोश भरेंगे। हालांकि उनके सामने पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म करना एक बड़ी चुनौती होगी। वही नवजोत सिंह सिद्धू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि हम महान गुरुओं की पवित्र भूमि पर खरगे साहब का स्वागत करते हैं। कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता आज उनके मार्गदर्शन की आशा करता है और सबसे पुरानी पार्टी के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी इच्छा ही हमारी कमान होगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी द्वारा 3 एजेंसियों के सहयोग के साथ सर्वे करवा रही है। कांग्रेस पार्टी सर्वे दौरान यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लोग आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर क्या सोच रहे हैं, लोगों की क्या चाहते हैं, वहीं चंडीगढ़ मेयर चुनाव दौरान पंजाब में गठबंधन को लेकर क्या राय है, फिलहाल कांग्रेस पार्टी की स्थिति साफ है। पार्टी दो धड़ों में नजर आ रही है। एक पक्ष कांग्रेस और आप के गठबंधन के पक्ष में है तो दूसरा पक्ष विरोध में उतर आया है। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि इस सर्वे का अच्छा परिणाम ही सामने आएगा। इस सर्वे की रिपोर्ट 28 फरवरी तक आएगी। पार्टी इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति को लेकर चलेगी। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पंजाब कांग्रेस ने चेहरों को चुन लिया है। पार्टी प्रत्येक क्षेत्र में 5-5 चेहरों के उतारने की चाहवान है। वहीं चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों को खुद दावेदारी करने का मौका भी दिया जा रहा है। बता दें कि आने वाले दिनों में आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और जल्द ही चेहरों का ऐलान कर दिया जाएगा।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू

पंजाब कांग्रेस की 11 फरवरी को लुधियाना में बुलाई गई रैली भले ही लोकसभा चुनाव में पार्टी का रोडमैप तय करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है, लेकिन इसी बीच प्रदेश इकाई की अंतर्कलह सामने आ गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली इस कन्वेंशन के सफल आयोजन के लिए गठित 16 सदस्यीय कमेटी में पूर्व प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, पार्टी की ओर से प्रदेश के सभी नेताओं को इस कन्वेंशन में हाजिर रहने के आदेश भी जारी किए गए हैं। यह पहला मौका है, जब कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के मामले में नवजोत सिद्धू की अनदेखी की है। इससे पहले हाईकमान ने चुनाव समिति का गठन करते हुए सिद्धू को भारी विरोध के बावजूद जगह दी थी। हालांकि, सिद्धू ने चुनाव समिति की पहली बैठक में शामिल न होते हुए उसके समानांतर अपने समर्थकों की बैठक बुलाकर हाईकमान को झटका दे दिया था। नवजोत सिद्धू इससे पहले भी प्रदेश कांग्रेस के कार्यक्रमों से दूरी बनाकर राज्य में अपने स्तर पर सियासी रैलियों का आयोजन करते रहे हैं, जिसे लेकर प्रदेश इकाई ने कई बार सवाल उठाए, लेकिन सिद्धू पर इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। अब 11 फरवरी की कन्वेंशन में नवजोत सिद्धू शामिल होंगे या नहीं, इस बारे में प्रदेश इकाई के पास कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर, नवजोत सिद्धू को लेकर पार्टी के किसी भी नेता ने कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।दरअसल, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बाद प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने भी सिद्धू के खिलाफ हाईकमान को रिपोर्ट सौंप दी है। प्रदेश प्रधान का कहना है कि कन्वेंशन में सभी नेताओं को हाजिर होने को कहा गया है। उनका कहना है कि यह पहला मौका है, जब पंजाब कांग्रेस में कन्वेंशन होने जा रही है, क्योंकि हाईकमान ने इसका आयोजन हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर ही किया है। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं और वर्करों में उत्साह भर दिया है, जिसका फायदा अवश्य ही आगामी चुनाव में भी होगा। पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश इकाई पूरी तरह तैयार है और सभी स्तरों पर नेताओं और वर्करों की कमेटियां गठित कर उन्हें जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दो साल के कार्यकाल में उन्होंने राज्य में पार्टी के 2145 मंडल प्रधान व 24570 मंडल कमेटी सदस्य, 289 ब्लॉक प्रधान, 8959 ब्लॉक समिति सदस्य, 29 जिला प्रधान व 2675 जिला सदस्य मनोनीत किए हैं, जिनसे हर महीने बैठक करके वह स्थिति की समीक्षा भी कर रहे हैं।

राज्य में ‘पंजाब बचाओ यात्रा’ निकाल रहे है सुखबीर बादलशिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में अकाली नेता राज्य में ‘पंजाब बचाओ यात्रा’ निकाल रहे हैं। इसी के तहत आज सुखबीर बादल फिरोजपुर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने भाषण के दौरान विरोधियों पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि गुजरात में लोग नरेंद्र मोदी को ही पसंद करते हैं और वह मुंह से कहते हैं कि उन्हें जो कुछ भी मिलता है वह नरेंद्र मोदी ही देते हैं इसीलिए लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद करते हैं। सुखबीर बादल ने पंजाब की जनता को बताया कि आज जो हो रहा है उनकी सरकार में ऐसा कभी नहीं हुआ, इसलिए लोग आगे आएं और पंजाब को बचाने में उनका साथ दें।

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