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🛑SGPC फिर घिरी विवादों में : सिख बुद्धिजीवियों ने लगाए बड़े आरोप, कहा- 70 लाख की कोठी 2.70 करोड़ में खरीदी, गुरु की गोलक को लगाया चूना
🛑केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाने की मांग, लालपुर को सौंपी शिकायत
🛑SGPC महासचिव गुरबचन सिंह की दो टूक, कहा चेयरमैन के पास नहीं कोई जांच का अधिकार

जालंधर (योगेश सूरी) : SGPC के अपने ही सदस्यों द्वारा संस्था में चल रहे घोटालों के बड़ो आरोपों के चलते सिखों की सर्वोच्च संस्था SGPC एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। दिलचस्प बात यह है की इस बार SGPC को विवादों में लपेटने वाले स्वयं इसी संस्था के सदस्य हैं। SGPC के सदस्यों ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से संस्था में हो रहे घोटालों की शिकायत की है व आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा से मांग की है कि SGPC में हो रहे घोटालों की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाई जाए। सिख बुद्धिजीवियों ने आनंदपुर साहिब SGPC सदस्य पर गंभीर आरोप लगाए कि वह संस्था के संसाधनों का अपने निजी फायदे के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। SGPC की आंतरिक समिति के सदस्य भाई मलकीत सिंह के नेतृत्व में सिख बुद्धिजीवियों, विचारकों के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा से कहा कहा कि SGPC के प्रशासनिक ढांचे में आई गिरावट से संगत में रोष है।प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन लालपुरा को शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि SGPC के कुछ शीर्ष अधिकारी SGPC सदस्यों और पदाधिकारियों के प्रभाव में बड़े पैमाने पर धांधली और घोटालों में लिप्त हैं। उन्होंने एक अदालती मामले का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि तख्त श्री केसगढ़ साहिब में 70 लाख रुपए की कोठी 2.70 करोड़ रुपए में खरीदकर गुरु की गोलक को चूना लगाया गया था। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि श्री आनंदपुर साहिब की SGPC के अधीन एक प्रतिष्ठित स्कूल की प्रिंसिपल और उसके पति से एक किलो अफीम मिली थी। इस मामले में कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई थी। SGPC के अधिकारी प्रिंसिपल को निलंबित या बर्खास्त करने की बजाय संरक्षण दे रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रिंसिपल से अब तक के वेतन की वसूली की भी मांग की। शिकायत पत्र में कहा कि SGPC सदस्य श्री आनंदपुर साहिब में SGPC के अधीन एक कॉलेज में कैंटीन और नियमों को ताक पर रखकर कई अन्य काम कर रहे हैं। जबकि उनका बेटा लुधियाना के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में उच्च पद पर तैनात है। SGPC सदस्य नियमों के अनुसार इस संस्था के साथ कोई व्यवसाय नहीं कर सकता है। अधिनियम, 1925 के अनुसार, एक सदस्य अपने ब्लड रिलेशन में किसी को SGPC में नौकरी भी नहीं दिला सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि SGPC सदस्य ने तख्त साहिब में दो कमरे (कमरा नंबर 3 और 4) व्यक्तिगत उपयोग के लिए स्थायी रूप से रखे गए हैं। इनका किराया 24 घंटे के लिए 1000 रुपये है। वफद ने माग की है कि 2011 से अब तक कुल 43 लाख 20 हजार रुपए SGPC सदस्य से वसूले जाएं। इस पत्र द्वारा सिख नेताओं ने कई अन्य मुद्दों को भी उठाया। और चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा से केंद्रीय एजेंसियों से उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश करने की मांग की, ताकि संगत सच्चाई जान सके और दोषियों को दंडित कर सके। लालपुरा ने मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में शिअद यूनाइटेड के उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह चहड़ माजरा, भूपिंदर सिंह बजरूड़ रोपड़, एसजीपीसी सदस्य हरदेव सिंह और अमरीक सिंह किला हकीमा के अलावा सुच्चा सिंह बस्सी, करम सिंह माणक माजरा, कपिल देव बावा, लखवीर सिंह लकी और कुलवंत सिंह कलकत्ता भी शामिल थे। दूसरी तरफ SGPC के महासचिव गुरबचन सिंह ने इस बारे दो टूक जबाव देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन के पास कोई शक्ति नहीं है कि वह SGPC की जांच करवा सकें। उन्होंने कहा कि अभी तक मामला उनके ध्यान में नहीं है कि क्या शिकायत की है किसकी शिकायत की है। जब मामला उनके ध्यान में आएगा तो वह उसका जवाब देंगे। वह मीडिया से भाग नहीं रहे हैं।

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